शून्यअंतर्मन_कविता_poetry

shuny antarman,शून्य अंतर्मन 

shuny antarman,शून्य अंतर्मन 

 शून्य अंतर्मन

अंतर्मन शून्य या द्वंद से भरा है,

कभी आत्मसंबल , कभी कमज़ोर सा धरा है। 

चहुँ ओर भीड़ है, पर हर कोई तनहा खड़ा है। 

बोल कुछ, और अंतर्मन कुछ और लिए धरा है। 


अंतर्मन शून्य या द्वंद से भरा है,

हिन्दूवादिता , सनातन ,संस्कृति सब भूले पड़े हैं 

पश्चिमी सभ्यताओं के खोखले चमक की ,

चकाचौंध में बस अन्धे पड़े हुए हैं। 


छोटे कपड़े और छोटी सोच लिए, 

नवीन सभ्यताओं के ढोल बजाए फटे पड़े  हैं। 


अंतर्मन शून्य या द्वंद से भरा है,

माँ की ममता दम तोड़, पार्टियों में उलझी पड़ी है। 


 पिता बस पैसे की मशीन हुआ पड़ा है।

सुविधाओं की संसार भरी पड़ी हैं लेकिन,

लेकिन भावो का अभाव शून्य पड़ा हुआ है।


अंतर्मन शून्य या द्वंद से भरा है,

कभी आत्म्समबल , कभी कमज़ोर सा धरा है। 


                           ✍️Shikha Bhardwaj ❣️







Shikha Bhardwaj

Hi, I'm Shikha. I help English learners improve vocabulary, grammar, speaking confidence, and communication skills through practical lessons and real-life examples.

1 Comments

If you have any doubt, please let me know.

  1. अंतर्मन में द्वन्द सबका मनोबल तोड़ रहा है
    करता कुछ है आदमी हो कूछ और रहा है

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